रविवार, 3 जुलाई 2016

वाणी

ऐसी बानी बोलिए , मन का  आपा  खोए
ओरन को शीतल करे,आपो शीतल होए
  

अर्थ==- मन के अहंकार को मिटाकर, ऐसे मीठे और नम्र वचन बोलो, जिससे दुसरे लोग सुखी हों और स्वयं भी सुखी हो |

शुक्रवार, 1 जुलाई 2016

बदलाव

आपकी  जिन्दगी आपके  हाथ में हे , आप  इस वक्त चाहे  जहा हो ,आपके जीवन में चाहे  जो भी  हुआ हो ,आप इसी वक्त अपने विचार बदलकर अपनी जिन्दगी बदल सकते हे,और निराशाजनक  स्थिति  जेसी कोई  चीज़  नहीं होती हे आपकी जिन्दगी की हर परिस्थति बदल सकती हे 

बुधवार, 29 जून 2016

ज्ञान


जाती न पूछो साधू की, पूछ लीजिए ज्ञान
मोल करो तलवार का, पड़ा रहने दो म्यान।

अर्थ: सज्जन की जाति न पूछ कर उसके ज्ञान को समझना चाहिए। तलवार का मूल्य होता है न कि उसकी म्यान का -  [ उसे ढकने वाले कवर का ]

गुरुवार, 29 मई 2014

"मडलावत" राजपूत, ठिकाना-भवरानी, जालोर, राजस्थान .

   हमारें दाता हुकम श्री मान ठाकुर साहब सामर्थ सिंह जी    
 नें दो शादियाँ की थीं पहली शादी से एक संतान श्री मान हुकम सिंह जी और दूसरी शादी आसपुर मेवाड़ में की जिनसें दो संतानें श्री मान तखत सिंह जी,  श्री मान दीप सिंह जी पैदा हुए इस प्रकार कुल मिला कर  - तीन संतानें हुई

1. श्री मान हुकम सिंह जी

2. श्री मान तखत सिंह जी

3. श्री मान दीप सिंह जी 

ठाकुर साहब श्रीमान  हुकम सिंह जी के छ संतानें हुईं .
1.दो बाईसा 
2 चारकुंवर
1. कुंवर शैतान सिंह 2. कुंवर मूल सिंह , 3.कुंवर पदम सिंह 4. कुंवर रतन सिंह
ठाकुर साहब श्री मान तखत सिंह जी के चार संतानें हुईं .
1. दो बाईसा
2. दो कुंवर
1.श्री मान धीरेन्द्र सिंह 2. श्री मान दशरथ सिंह
ठाकुर साहब श्री मान दीप सिंह के एक संतान हुईं

1. कुंवर औकार सिंह मडलावत