आपकी जिन्दगी आपके हाथ में हे , आप इस वक्त चाहे जहा हो ,आपके जीवन में चाहे जो भी हुआ हो ,आप इसी वक्त अपने विचार बदलकर अपनी जिन्दगी बदल सकते हे,और निराशाजनक स्थिति जेसी कोई चीज़ नहीं होती हे आपकी जिन्दगी की हर परिस्थति बदल सकती हे
हमारें दाता हुकम श्री मान ठाकुर साहब सामर्थ सिंह जी
नें दो शादियाँ की थीं पहली शादी से एक संतान श्री मान हुकम सिंह जी और दूसरी शादी आसपुर मेवाड़ में की जिनसें दो संतानें श्री मान तखत सिंह जी, श्री मान दीप सिंह जी पैदा हुए इस प्रकार कुल मिला कर - तीन संतानें हुई
1. श्री मान हुकम सिंह जी
2. श्री मान तखत सिंह जी
3. श्री मान दीप सिंह जी
ठाकुर साहब श्रीमान हुकम सिंह जी के छ संतानें हुईं .
1.दो बाईसा
2 चारकुंवर
1. कुंवर शैतान सिंह 2. कुंवर मूल सिंह , 3.कुंवर पदम सिंह 4. कुंवर रतन सिंह
ठाकुर साहब श्री मान तखत सिंह जी के चार संतानें हुईं .