गुरुवार, 29 मई 2014

"मडलावत" राजपूत, ठिकाना-भवरानी, जालोर, राजस्थान .

   हमारें दाता हुकम श्री मान ठाकुर साहब सामर्थ सिंह जी    
 नें दो शादियाँ की थीं पहली शादी से एक संतान श्री मान हुकम सिंह जी और दूसरी शादी आसपुर मेवाड़ में की जिनसें दो संतानें श्री मान तखत सिंह जी,  श्री मान दीप सिंह जी पैदा हुए इस प्रकार कुल मिला कर  - तीन संतानें हुई

1. श्री मान हुकम सिंह जी

2. श्री मान तखत सिंह जी

3. श्री मान दीप सिंह जी 

ठाकुर साहब श्रीमान  हुकम सिंह जी के छ संतानें हुईं .
1.दो बाईसा 
2 चारकुंवर
1. कुंवर शैतान सिंह 2. कुंवर मूल सिंह , 3.कुंवर पदम सिंह 4. कुंवर रतन सिंह
ठाकुर साहब श्री मान तखत सिंह जी के चार संतानें हुईं .
1. दो बाईसा
2. दो कुंवर
1.श्री मान धीरेन्द्र सिंह 2. श्री मान दशरथ सिंह
ठाकुर साहब श्री मान दीप सिंह के एक संतान हुईं

1. कुंवर औकार सिंह मडलावत



मंगलवार, 27 मई 2014

जय श्री कृष्ण



भवरानी


भवरानी



भवरानी

आवश्यकता आविष्कार की जननी होती हैं, फिर भी लक्ष्य के रास्तों में बाधाएं बहुत होती हैं, जैसे चंदन अथवा मेहँदी को हम अनुभवों से नहीं समझते तब तक हमारे जीवन में उनकी सार्थकता का ज्ञान हमे नहीं होने से उनके लाभ से वंचित हो ही जाते. ठीक हर इंसान में अच्छाई-बुराई दोनों होने से पूर्वाग्रहों के कारण से ही मानव अँधेरी रातों में प्रकाश का उपयोग नहीं पाते, आप को ज्ञानी के पास विनम्र हो कर जाने पर अपनी समस्याओं का समाधान अवश्य मिल सकता हैं

 कुंवर ओंकार सिंह मडलावत  

भवरानी

छोटा बच्चा पत्थर फेंकते आप ने देखा होगा, पत्थर फेकनें का कोई एक आधार होता हैं, अर्थात किसी आनंद या हानि पहुँचाने के लिए इस प्रकार का कदम उठता हैं जो एक लक्ष्य होता हैं, ठीक उस क्रिया की तुलना में दूसरा बच्चा सकारात्मक सोच के साथ वैसी किया करता तो लक्ष्य पा जाता, परन्तु अलक्षित परिणाम से वैसा ही करता तो नकारात्मक सफलता मिलती हैं.या प्रारंभिक उत्साह में ढील दे देता तो भी सफलता में स्थित नहीं कर पाता. इस प्रकार का क्रम के कर्म करता हैं तो बचपन का पौधा भविष्य का पेड़ यथा कर्म का फलदायी होगा.

कुंवर ओंकार सिंह मडलावत  

सोमवार, 26 मई 2014

जय माता जी की

आज असीम हर्ष की बात हैं की नागनेशाय माता जी की कृपा से मुझे ठिकाना भवरानी को इंटरनेट की दुनिया में प्रवेश की अनुँमती प्राप्त हुईं. आप सभी सिरदारो को जय माता जी की .